ज्यादा सोचना भी हानिकारक

कहानी है,एक व्यक्ति की जो किसी भी लॉक को खोल सकता था चाहे वो किसी तिजोरी का लॉक हो , चाहे किसी बैंक का लॉक हो , चाहे किसी की गाड़ी का लॉक हो, जेल का लॉक हो, किसी भी हाई सिक्योरिटी का लॉक हो उसे खोल देता था। लोग हैरान थे की ये ऐसा कैसे कर सकता है। तो फिर एक दिन एक इवेंट रखा गया, एक चैलेंज रखा गया की ये एक चैम्बर का लॉक खोलेगा और वो बहार आजाएगा । उसको एक चैम्बर मैं बंद कर दिया जाएगा  और एक स्वविमिंग पूल मैं दाल दिया जाएगा अगर वो लॉक खोल पाया तो बहार ाजेगा वर्ण अपनी हार एक्सेप्ट भी कर सकता है की मैं ये लोक नहीं खोल सकता हूँ। उसने वो  चैलेंज  एक्सेप्ट कर लिया, क्युकी उसे विश्वाश था की वो लॉक खोलने में कामयाब हो जाएगा और बहार आ जाएगा। बहुत लोग अपने कामेरे साथ ले कर आये वो सब सूत करने के लिए। व्यक्ति को चैम्बर में डाला गया और लॉक लगा दिया गया। अब उस चैम्बर को धीरे धीरे पानी ने उतरा गया।

अभी जो स्टोरी आपको मैं बताने जा रहा हूँ, हो सकता है वो आपने कही न कही सुनी होगी, पर इस के पीछे जो मोरल है जो हर लाइफ के हर मोमेंट में काम आता है।

लोग देख रहे है और सब एक्ससिटेड है की क्या होगा। सब देखना चाहते थे की किस तरह ये व्यक्ति लॉक खोल कर बहार आएगा। उस व्यक्ति ने अपनी जेब से एक तार निकला और लॉक को खोलना स्टार्ट कर दिया। और टाइम चलता जा रहा था उस व्यक्ति के लिए एक एक सेकंड बहुत कीमती था क्युकी उसको सास रोकनी बहुत मुश्किल हो रही थी। लोग सोच रहे थे ये हर बार कुछ ही सेकंड में लॉक खोल देता है तो इस बार इतना टाइम क्यों ले रहा है। सेकंड जैसे बढ़ते गए उस व्यक्ति का धम घुटने लगा। उसको परेशानी हो रही थी वो लॉक खोलने में ।

उस व्यक्ति ने अपना पूरा जोर लगा दिया , अपनी पूरा एक्सपीरियंस लगा दिया , अपना पूरा दिमाग लगा दिया, पर वो लॉक खोल नहीं पा रहा था । फाइनली उसको हार मानना ठीक लगा और उसने इमरजेंसी रिंग बजा दी की मैं हार मानाने के लिए त्यार हूँ। फिर जैसे ही उसने इमरजेंसी रिंग बजायी वो चैम्बर धीरे धीरे पानी से ऊपर आने लगा। और उसको बहुत हारा हुआ फील हो रहा था। वो लोगो से नजरे नहीं मिला पा रहा था, वो चैम्बर में निचे बैठा हुआ होता है और उसने चैम्बर का गेट पकड़ा हुआ होता है। और वो जैसे ही उदने की कोशिश करता है तो एक धाम से चैम्बर का गेट खुल जाता है। और उसे पता चलता है की गेट लॉक था ही नहीं, उसने सोचा ये मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आया की गेट लॉक भी नहीं किया गया होगा। जब इतना दिमाग और टिप्स लगाने के बाद लॉक नहीं खुल रहा था तो उसके दिमाग में एक बार भी  ये क्यों नहीं आया की क्या पता लॉक किया ही न गया हो।

जब सलूशन बहुत आसान होता है तो आप कितने भी टैलेंटेड क्यों न हो आपका टैलेंट कभी काम नहीं आएगा जब तक आप आराम से सोचोगे नहीं। कई बार कुछ ना करना ही सलूशन होता है , कई बार बस ये देखना ही सलूशन होता है की वाकई में प्रॉब्लम है भी या नहीं। हम आस पास के लोगो से ये सुनते रहते है, वीडियोस में देखते है , किताबो में पढ़ते है , की हमेशा बिजी रहो बिजी रहो। बिजी लोगो की वैल्यू होती है । ये एक ट्रेंड सा चल गया है की बिजी लोग बड़े लोग होते है। बिजी रहना अच्छा है लोगो के लिए, but some time its is great to be free।

कुछ भी नहीं करना कई बार सही होता है। क्युकी जब कुछ नहीं कर रहे होते है तब ऐसे आइडियाज आते है जो बिजी रहते हुए कभी नहीं आ सकते है। बहुत काम लोग इस बात को समझ पाते है।

इसी लिए ज़्यदातर स्टार्टअप जो स्टार्ट हुए है २० साल की उम्र के लोगो ने स्टार्ट किये है , क्युकी इस उम्र में सब से फ्री माइंड वाली आगे होती है। वो व्यक्ति चैम्बर के लॉक को खोलने में , लोगो को इम्प्रेस करने में इतना बिजी हो गया था की उसने एक बार भी ये नहीं सोचा या एक बार भी उसके दिमाग में ये नहीं आया की हो सकता है चैम्बर लॉक ही न हो। इसी तरीके से हम अपनी ज़िन्दगी जी रहे है। तभी सलूशन नहीं मिल रहा क्युकी हम ढहर के नहीं सोच रहे है। कभी कभी हुम्हे बिखुल फ्री मंद हो कर आराम से प्रॉब्लम के बारे मैं सोचना है और फिर देखे आपको सलूशन कितनी जल्दी मिलता है।

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